हिंदू पंचांग एवं कैलेंडर 2026 (अक्टूबर)
आश्विन - कार्तिक (विक्रम संवत 2083) · नई दिल्ली (IST) आधारित दृक् गणना · सभी व्रत, त्यौहार व दैनिक चौघड़िया मुहूर्त।
दैनिक पंचांग: 16 अक्टूबर 2026 (शुक्रवार)
आश्विन मास · शुक्ल पक्ष · षष्ठी
मासिक कैलेंडर ग्रिड · अक्टूबर 2026
(किसी भी तारीख पर क्लिक करके पूरा पंचांग देखें)हिंदू पंचांग क्या है और इसका क्या महत्व है? (What is Hindu Panchang?)
सनातन धर्म में पंचांग केवल तिथियों और दिनों का कैलेंडर नहीं है, बल्कि यह सूर्य और चंद्रमा की गति पर आधारित काल-गणना (Time Computation) का सबसे वैज्ञानिक और सूक्ष्म वैदिक माध्यम है। "पंचांग" शब्द का अर्थ है — पंच + अंग, यानी काल के पांच प्रमुख घटक। जब भी कोई नया काम, गृह प्रवेश, विवाह, मुंडन, नामकरण, व्यापार शुभारंभ या धार्मिक अनुष्ठान किया जाता है, तब पंचांग शुद्धि देखकर ही शुभ समय तय किया जाता है।
पंचांग के 5 प्रमुख अंग (The Five Limbs of Panchang)
वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार प्रतिदिन इन 5 तत्वों की स्थिति को जानना अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है:
शुभ मुहूर्त एवं अशुभ समय का नियम (Auspicious Timings & Inauspicious Periods)
अभिजित मुहूर्त (Abhijit Muhurat)
प्रतिदिन दोपहर के समय लगभग 48 मिनट का समय अभिजित मुहूर्त कहलाता है। यह भगवान श्री हरि विष्णु का प्रिय मुहूर्त है, जिसमें बिना किसी पंचांग दोष के सभी शुभ और मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं।
राहुकाल (Rahukaal - अशुभ समय)
दिन के आठवें भाग को राहुकाल माना जाता है जो प्रतिदिन लगभग 90 मिनट का होता है। इस दौरान कोई भी नया व्यवसाय, यात्रा, धन का लेनदेन या मांगलिक कार्य शुरू करना पूर्णतः वर्जित माना गया है।
ब्रह्म मुहूर्त (Brahma Muhurat)
सूर्योदय से लगभग 1 घंटा 36 मिनट पूर्व का समय ब्रह्म मुहूर्त होता है। यह समय ध्यान, योग, अध्ययन और ईश्वर आराधना के लिए संपूर्ण सृष्टि का सबसे सात्विक और ऊर्जावान काल है।
पंचांग एवं विवाह संबंधी अन्य मुफ़्त साधन (Related Free Vedic Tools)
पंचांग से जुड़े सामान्य प्रश्न (Panchang FAQs)
दैनिक पंचांग में तिथि की गणना कैसे होती है?▼
चंद्रमा जब सूर्य से 12 डिग्री आगे बढ़ता है, तो एक तिथि पूर्ण होती है। एक चंद्र मास में 30 तिथियां होती हैं (15 शुक्ल पक्ष और 15 कृष्ण पक्ष)। सूर्योदय के समय जो तिथि उपस्थित होती है, उसे 'उदयातिथि' माना जाता है और व्रत-त्यौहार उदयातिथि अनुसार ही मनाए जाते हैं।
राहुकाल में कौन-से कार्य नहीं करने चाहिए?▼
राहुकाल में कोई भी नया कार्य शुरू करना, नए वाहन या संपत्ति का क्रय, विवाह की बात पक्की करना, गृह प्रवेश, मुंडन संस्कार और महत्वपूर्ण व्यावसायिक अनुबंध पर हस्ताक्षर करना वर्जित माना गया है। पहले से चल रहे नियमित कार्य किए जा सकते हैं।
क्या इस मासिक पंचांग का PDF मुफ़्त डाउनलोड कर सकते हैं?▼
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